नागरिकता संशोधन बिल के निहितार्थ
December 18, 2019 • Deepak jyoti tripathi

जिस प्रकार से नागरिकता बिल को लेकर एक वर्ग विशेष के लोग पूरे देश में उग्र आंदोलन खड़ा कर रहे हैं इसको देखते हुए ऐसा लगता है कि वाकई इस देश का   नमक खाकर और इसी देश की जड़ों को खोखला करने के लिए एक बहुत बड़ा वर्ग इस देश में तैयार बैठा है। आखिर इस देश में रहने वाले नागरिकों को कहां इस नागरिकता से वंचित किया जा रहा है जो यहां पर स्थाई रूप से पूर्व के नागरिक है उनके लिए इस बिल में ऐसा कोई भी प्रावधान नहीं है कि उनकी नागरिकता को कोई खतरा पहुंचे। जहां तक मैंने इस बिल के बारे में सुना व अध्ययन किया ऐसा कहीं भी कुछ नहीं दिख रहा है जिससे कि यह लगे कि इस देश में रहने वाले किसी भी वर्ग को इस देश की नागरिकता से वंचित किया जाएगा। आखिर धर्म के नाम पर पाकिस्तान बना है और उसी वक्त इमानदारी से जब धार्मिक आधार पर भारत का बंटवारा हुआ यह बंटवारा वैसे तो होना ही नहीं चाहिए था लेकिन जब बंटवारा हुआ धर्म के आधार पर तो उसी वक्त इमानदारी से इस्लाम के बंधुओं को भारतवर्ष छोड़कर के पाकिस्तान में जाकर स्थाई रूप से  बसना चाहिए तथा पाकिस्तान से हिंदुओं को पूर्ण रूप से भारत में आकर बस जाना चाहिए क्योंकि आज धीरे-धीरे पाकिस्तान में जो हिंदू आबादी थी वह आबादी धीरे-धीरे समाप्त की ओर बढ़ गई।                                    पत्रों व टीवी समाचारों में हमेशा देखने में आता है धार्मिक प्रताड़ना की शिकार भी है ऐसे में अगर उनको हिंदुस्तान में स्थाई नागरिकता देने का प्रावधान बनाया जा रहा है या ऐसा कोई कानून लाया गया है कि अफगानिस्तान बांग्लादेश पाकिस्तान के हिंदू नागरिक अगर चाहे तो यहां पर उनको नागरिकता मिल सकती है। सच पूछिए तो जो इस्लामिक राष्ट्र है इस्लाम के लिए शासन कर रहे हैं राजनीति कर रहे हैं शरिया कानून की वकालत कर रहे हैं वहां पर मुसलमानों का बहुत ज्यादा सम्मान होना चाहिए जो इस्लाम को मानने वाले हैं ऐसे में उन देशों को चाहिए कि अगर उन्हें लगता है कि उनका मुसलमान भाई हिंदुस्तान में प्रताड़ित हो रहा है तो उनको भी हिंदुस्तान के मुसलमानों की नागरिकता के लिए अपने दरवाजे खोल दें। हालांकि हमारे समझ से भारतवर्ष में रहने वाले हमारे मुसलमान भाई जितना आजादी से यहां रह रहे हैं इतनी आजादी शायद इन्हें दूसरे मुस्लिम मुल्कों में ना मिले जहां तक मेरा मानना है कहीं-कहीं तो यहां के मुसलमानों को वह मुस्लिम देश मुसलमान नहीं मानते कहते हैं यह कन्वर्टेड मुसलमान इस प्रकार से आप स्वयं समझे कि इस देश में रहने वाले मुसलमान जो किसी समय अल्पसंख्यक कहलाते थे आज लगभग 30 करोड़ के करीब उनकी पॉपुलेशन है जबकि वह  बहुसंख्यक हो गए हैं। उनके विधायक हैं सैकड़ों उनके सांसद हैं। इस देश में राष्ट्रपति पद  सर्वोच्च न्यायालय से लेकर सरकारी ऑफिस में बेरोकटोक उच्च पदों पर आसीन है।                                                    इसके बाद इस देश के हित में लिए गए किसी भी फैसले के विरुद्ध अगर इस प्रकार का उग्र आंदोलन सड़कों पर दिखता है तो इनको आप देशभक्त कहेंगे या देशद्रोही कहेंगे यह प्रजातंत्र है सभी को समान अधिकार है देश हित में लिए गए निर्णय को अगर लोग बेवजह हिंसक प्रदर्शन कर इस प्रकार की हरकतें करते हैं जिनका कोई अर्थ समझ में नहीं आता है तो यह बात हमारे समझ से परे है कि ऐसा उग्र प्रदर्शन नागरिकता बिल को लेकर क्यों जिस वक्त कश्मीर से पंडितों को निकाला गया। उस वक्त कहीं भी कोई आंदोलन किसी ने नहीं किया कि यह कश्मीरी पंडितों को कश्मीर से बेदखल करना गलत है। लेकिन आज हम इस बिल में देख रहे हैं कि किसी भी धर्म या वर्ग के लोग को हिंदुस्तान से बेदखल नहीं किया जा रहा है बल्कि जो शरणार्थी के रूप में आकर यहां पर गलत तरीके से नागरिकता लेकर बैठे हैं उनको उनके देश भेजने की व्यवस्था की जा रही है। मैं समझता हूं कि यह कोई गलत नहीं है क्योंकि इस देश में खुद ही इतनी ज्यादा आबादी का बोझ है कि यहां की विकास योजनाएं उससे प्रभावित हो रही है। ऐसे में दूसरे देश के घुसपैठिए अगर यहां आकर गलत तरीके से रह रहे हैं तो यह कानूनन जुर्म है। और जो उनका साथ  देता है वह भी अपने देश हित के विरुद्ध यह उससे भी बड़ा जुर्म है। ऐसे में सरकार को कोई नया कानून बनाना चाहिए कि देश हित में लिए गए निर्णय का विरोध अगर कोई करता है तो वह देशद्रोह की श्रेणी में आना चाहिए मैं किसी दल विशेष या व्यक्ति विशेष के बारे में नहीं कह रहा हूं लेकिन इस नागरिकता बिल को देखने के बाद जो मेरी समझ आया यह मेरे अपने विचार हैं।