बसपा नेता की फैक्ट्री में हड्डी-चर्बी वाला तेल
November 7, 2019 • NP Network

बुलंदशहर। यूपी के बुलंदशहर में पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड और प्रशासन की टीम ने आज बसपा नेता  महेंद्र सागर की फैक्ट्री से पशुओं की चर्बी और हड्डी से तेल निकलने के अवैध धंधे का भंडाफोड़ किया है। टीम ने अवैध कारखाने से करीब चार हज़ार लीटर चर्बी से बना तेल बरामद कर  किया और प्रदूषण फैला रही कारखाने की भट्टियों को नष्ट करवाकर कारखाने पर भी सील लगा दी। इस कार्रवाई से चर्बी- हड्डी के गोरखधंधे में लगे धंधेबाजों में हड़कम्प मच गया है।पशुओ की चर्बी और तेल साबुन व सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण में प्रयोग किया जाता है


वीओ: बुलंदशहर जिला प्रशासन में उस समय हड़कम्प मच गया, जिस समय उनको खबर मिली की कोतवाली बुलंदशहर छेत्र के हीरापुर में बसपा नेता की फैक्ट्री में अवैध रूप से चर्बी गलाकर तेल निकालने का धंधा चल रहा है। और भट्टियां धुंआ उगल रही है। डीएम ने  सिटी मजिस्ट्रेट विवेक मिश्रा की अगवाई में तत्काल पॉल्युशन विभाग की टीम को मौके पर भेजा। फैक्ट्री में विशाल भट्टिया और चर्बी से बने तेल के ड्रमों का अंबार देखकर अफसरों की आंखे खुली की खुली रह गई। टीम ने जेसीबी बुलाकर भट्टियों को तुड़वाया और चर्बी से निकाले गए तेल को जब्त कर लिया। टीम ने इस अवैध कारखाने में चर्बी से निकाले गए तेल के 18 ड्रम बरामद किए। ड्रमों में चर्बी वाले तेल की मात्रा करीब 4000 लीटर बताई जा रही है। प्रारम्भिक जांच में पता चला है कि चर्बी वाले इस तेल की आपूर्ति साबुन और डिटर्जेंट पॉउडर बनाने वाली कम्पनियों को की जाती है। यानि साबुन और सर्फ को चिकना बनाने के लिए पशुओं की चर्बी से निकाले गए तेल का प्रयोग किया जा रहा था।

पॉल्युशन और प्रशासन की टीम ये भी पता लगाने में जुटी है कहीं चर्बी वाले इस तेल की खपत होटल और ढाबों पर तो नहीं थी। हालांकि यह तो अभी जांच के गर्भ में है लेकिन सवाल यह है कि लंबे अरसे से चले आ रहे इस धंधे की भनक प्रशासन को आखिर क्यों नहीं लगी। एक लीटर चर्बी वाले तेल की कीमत 30 रुपये बताई जा रही है। चर्बी से तेल बनाने वाली फैक्ट्री का मालिक बसपा नेता महेंद्र सागर फरार बताया जा रहा है। महेंद्र सागर बसपा शिकारपुर विधानसभा छेत्र का प्रभारी रह चुका है। खासबात यह है कि चर्बी से तेल निकलने वाली इस फैक्ट्री को एक माह पूर्व भी बन्द करवाया गया था, इसके बावजूद फिर से इस फैक्ट्री में चर्बी गलाने का काम किस की शह पर शुरू किया गया। यह जांच का विषय बना हुआ है।