मुस्लिम प्रोफेसर से नहीं पड़ेंगे संस्कृत
November 19, 2019 • NP Network

उसने दूसरी कक्षा से अब तक सिर्फ संस्कृत की पढ़ाई की है .
उसने संस्कृत से ही बीए, एमए और पीएचडी की है .
उसने NET और JRF क्वालिफाई किया है .
फिर भी बीएचयू के संस्कृत छात्र उससे संस्कृत नहीं पढ़ना चाहते क्योंकि उसका नाम फिरोज खान है . राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान से पीएचडी और कुछ दिनों तक वहीं अध्यापकी के बाद बीएचयू में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त हुए फिरोज खान का गुनाह सिर्फ इतना है कि वो मुस्लिम है . हिन्दुत्व के स्वयंभू ध्वजाधारी छात्र फिरोज नामधारी इस मुस्लिम प्रोफेसर से संस्कृत नहीं पढना चाहते . ये छात्र पढ़ाई तो संस्कृत की कर रहे हैं लेकिन उनके भीतर 'नफरती संस्कृति' की जड़े जम गई है . तभी तो ये छात्र और उनके सरपरस्त अपनी नफरतों के सलीब पर प्रोफेसर फिरोज को टांग देने पर आमादा हैं . 

प्रोफेसर फिरोज की नियुक्ति के ग्यारह दिन बीत चुके हैं .  संस्कृत छात्रों के विरोध और हंगामे के डर से प्रोफेसर फिरोज खान कहीं अंडरग्राउंड हैं . उनका फोन बंद है . किसी के संपर्क में नहीं हैं . उनकी नियुक्ति का विरोध करने वाले सोशल मीडिया पर 'बीएचयू में फिरोज क्यों' हैशटैग के साथ कैंपेन चला रहे हैं . हर कीमत पर उन्हें प्रोफेसर फिरोज से मुक्ति चाहिए . संस्कृत के छात्रों के लिए  प्रोफेसर सिर्फ मुसलमान भर है , जिससे पढ़ना उन्हें मंजूर है . और फिरोज खान की त्रासदी ये है कि उस शख्स ने दूसरी कक्षा से अब तक संस्कृत के अलावा कुछ कायदे से कुछ पढ़ा ही नहीं है . वो कहते हैं 'मुझे भी कुरान के बारे में भी उतना नहीं पता , जितना मैं संस्कृत जानता हूं .मेरे इलाके के हिन्दू भी बहुत खुश होते थे कि मैं संस्कृत पढ़ता हूं .कभी सोचा नहीं था कि ऐसे दिन भी आएंगे '. पच्चीस साल पहले से संस्कृत पढ़ रहे फिरोज खान ने इस दिन की कल्पना नहीं की तो उनका कसूर . अब ऐसे दिन आ गए तो आ गए . झेलना तो होगा प्रोफेसर फिरोज को . उस प्रोफेसर फिरोज को , जिनके छोटे भाई ने भी संस्कृत की ही पढ़ाई की है . संस्कृत में ग्रेजुएट उनके पिता रमजान खान भजन गाते हैं और गौशालाओं के लिए फंड जुटाते हैं . दादा भी यही काम करते थे . अपने बैच में फिरोज अकेले ऐसे मुस्लिम छात्र थे , जिन्होंने उच्च शिक्षा के लिए संस्कृत को चुना . जब बीएचयू के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर तलाशने की प्रक्रिया शुरु हुई तो दस दावेदारों में फिरोज खान टॉप पर थे . वो नियुक्त कर लिए गए लेकिन छात्रों ने हंगामा शुरु कर दिया कि मुस्लिम प्रोफेसर से नहीं पढ़ेंगे संस्कृत . 

हंगामा करने वाले छात्रों की दलील कि 'जो हिन्दू नहीं है और संस्कृत के धार्मिक अध्यायों को कैसे पढ़ा सकता है ' . प्रोफेसर फिरोज का कहना है - 'मैं संस्कृत साहित्य का प्रोफेसर हूं . मेरा काम अभिज्ञान शाकुंतलम , उत्तर रामचरितम जैसे संस्कृत साहित्य , महाकाव्य और उसके पहलुओं को पढ़ना है . धर्म से इसका लेना -देना नहीं . '  आज के दौर में इस बात पर हैरान होने की जरुरत नहीं कि  बहुत से प्रोफेसर भी फिरोज खान का विरोध करने वाले छात्रों का समर्थन कर रहे हैं . जिस राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान से फिरोज ने पीएचडी की है , उसके प्रिंसिपल तक इस प्रोफेसर के फिरोज होने के बाद भी उसके संस्कृत ज्ञान की तारीफ करते नहीं अघा रहे हैं . उसके अच्छा इंसान और अच्छा शिक्षक होने की तस्दीक कर रहे हैं लेकिन कौन सुनने वाला है उसकी जो फिरोज की हिमायत कर रहा हो।

मुझे अफसोस है प्रोफेसर फिरोज कि हम आपकी कोई मदद नहीं कर सकते ।

अफसोस कि फिरोज कि संस्कृत में बीए,एमए और पीएचडी करके भी 'नफरती संस्कृति' के झंडाबरदारों के शिकार हो रहे हैं।

मुझे अफसोस है कि देश का सत्ता तंत्र आपके मौलिक,लोकतांत्रिक और नागरिक अधिकारों का हनन होते चुपचाप देख रहा है।